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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 37, Verse 70

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 37, verse 70 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 37 · श्लोक 70

संस्कृत श्लोक

चिद्वारिणि जगत्तुङ्गतरङ्गद्रवरूपिणि । किं नु वा कथमुत्पन्नं किं शान्तं च कदा कथम् ॥ ७० ॥

हिन्दी अर्थ

जगद्रूषी महातरंगों से युक्त द्रवशील चितिरूपी जल में कौन-सा पदार्थं कैसे उत्पन्न हुआ या कौन-सा पदार्थ कब कैसे शान्त ही हुआ २।