Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 37, Verse 79
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 37, verse 79 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 37 · श्लोक 79
संस्कृत श्लोक
परमार्थनिजामोदाः सहजाः सर्गविभ्रमाः ।
नोद्यन्ति नोपशाम्यन्ति लेखा इव शिलोदरे ॥ ७९ ॥
हिन्दी अर्थ
परमार्थ चिदाकाश के अपने आमोदरूप
स्वाभाविक ये सृष्टि के विभ्रम हैं। ये स्फटिकमणि के भीतर दिखाई दे रही रेखाओं की नाई न तो
उत्पन्न होते हैं और न नष्ट ही होते हैं