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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 37, Verse 80

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 37, verse 80 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 37 · श्लोक 80

संस्कृत श्लोक

अन्योन्यं कुसुमामोदा मिलिता अप्यमीलिताः । व्योमरूपास्तथा सर्गा अन्योन्यं सिद्धभूमयः ॥ ८० ॥

हिन्दी अर्थ

पुष्पों की गन्ध और सिद्धों की भूमि जैसे परस्पर मिली हुई रहने पर भी मिली हुई नहीं रहती, वैसे ही चिदाकाशरूप ये सृष्टियाँ भी हैं