Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 37, Verse 82
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 37, verse 82 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 37 · श्लोक 82
संस्कृत श्लोक
न ज्ञानवादिता सत्या न बाह्यानर्थवादिता ।
यथावेदनमेतानि वेदनानि फलन्ति वः ॥ ८२ ॥
हिन्दी अर्थ
की बाह्यअनर्थवादिता (८) ही सत्य है, किन्तु आप लोगों के संकल्प के अनुसार ये सभी ज्ञान
फलीभूत होते हैं