Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 38, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 38, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
हेमत्वमेव नान्यत्वं हेमरूपशते यथा ।
शान्तत्वमेव शान्तस्य सर्गाहंत्वगणे तथा ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
अविकारिता मे दृष्टान्त कहते हैं /
सैकड़ों सुवर्णं के रूपों में जैसे सुवर्णत्व ही रहता है, दूसरा नहीं, वैसे ही शान्त ब्रह्म के सैकड़ों
जगद्भाव ओर जीवभावं में शान्त ब्रह्मरूपत्व ही रहता हे