Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 38, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 38, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
त्रैलोक्ये तन्न पश्यामि सदेवासुरमानुषम् ।
एकरोमांशविश्वस्य यल्लोभाय महात्मनः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
तीनों लोकों में देवता, असुर और मनुष्य से युक्त ऐसी किसी वस्तु
को मैं नहीं देखता, जो एक रोमांश के सदृश सारे विश्व को समझनेवाले महात्मा के लोभ के
लिए हो