Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 38, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 38, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
सर्वार्थरिक्तमनसः सतः सर्वात्मनस्तव ।
सर्वथा सर्वदा सर्वं सर्वमाचरणं शिवम् ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे
श्रीरामचन्द्रजी, मेरे ही समान यथार्थवस्तु के ज्ञान से भ्रान्ति का नाश हो जाने पर आपका मन भी
जब सम्पूर्ण पदार्थों से शून्य हो जायेगा, तब सद्रूप सवत्मिक आपको भी यह सम्पूर्ण आचरण
सर्वात्मक शिवस्वरूप ही (निर्वाणरूप ही) अवभासित होगा