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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 38, Verse 39

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 38, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 39

संस्कृत श्लोक

यद्रूपालोकमननं यत्कालत्रितयं जगत् । यज्जरामरणार्त्यादि तन्महाचिन्नभः शिवम् ॥ ३९ ॥

हिन्दी अर्थ

जो कुछ बाह्य और आन्तर विषय हैं, जो भूत आदि तीन काल है तथा जो जरा, मरण, पीड़ा आदि हैं, वे सब महाचैतन्यरूप शिवमय आकाशरूप ही हैं