Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 38, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 38, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
निश्चिकित्सो निराभासो निरिच्छो निर्मना मुनिः ।
भूत्वा निरात्मा निर्वाणस्तिष्ठ संतिष्ठसे यथा ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
दुःखशान्ति के उपायों के
अन्वेषण से रहित, भ्रमशून्य, इच्छारहित, मन वर्जित, मुनि एवं अहंभावरहित होकर जिस
प्रकार से मोक्षरूप बनकर आपसे स्थित रहा जा सकता है, उस तरह से स्थित रहिए