Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 38, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 38, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
द्रष्टृदृश्ये न यद्येकमभविष्यच्चिदात्मके ।
तद्दृश्यास्वादमज्ञः स्यान्ना दृष्ट्वेक्षुमिवोपलः ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
द्रष्टा ओर दृश्य की एकता में अनुकूल तर्क बतलाते हैं /
द्रष्टा और दृश्य यदि चिदात्मक साक्षी में एकता प्राप्त नहीं करते, तो ईख खाने में प्रवृत्त पुरुष
ईख देखकर और चूसकर भी पत्थर के सदृश उसके स्वाद या माधुर्य का अनुभव नहीं करता,
क्योकि जड़ तो रस का अनुभव कर नहीं सकता और न जड़ रस ही उसके प्रति प्रकाशित हो
सकता है