Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 38, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 38, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

यदा चिन्मात्रमेवेयं द्रष्टृदर्शनदृश्यदृक् । तदानुभवनं तत्र सर्वस्य फलितं स्थितम् ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

इस तरह द्रष्टा, दृश्य ओर दर्शन-ये सभी, चिति की एकता के बल से ही जब सिद्ध होते हैं, तब ये चिन्मात्रस्वरूप ही हैं, ऐसी स्थिति में सब जगत्‌ का स्वरूप केवल अनुभवमात्र ही परमार्थ से सिद्ध होता है, यह अर्थ निकलता है