Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 39, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 39, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
आत्मस्वभावविश्रान्तेरियं वस्तुस्वभावता ।
यदहंतादिसर्गादिदुःखाद्यनुपलम्भता ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
सत्-रूय वस्तु के अज्ञान का स्वभाव बतलाकर अब आत्मज्ञान में प्राप्त विश्रान्ति का जो
असली विह है उसे बतलाते हैं /
अहंभाव आदि, सृष्टि आदि तथा दुःख आदि का ज्ञान न होना ही यानी अहम्भाव आदि की निर्विषय
चैतन्यमात्ररूपता ही आत्मा के स्वभाव में प्राप्त हुई विश्रान्ति का असली चिह्न है