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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 39, Verse 21

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 39, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

सूक्ष्मे बीजेऽस्त्यगः स्थूलो दृष्टमित्युपपद्यते । शिवे मूर्ते जगन्मूर्तमस्तीत्युत्तमसंकथा ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

इष्ट कस्तु के ग्रहण में उपाय क्या हैं 2 इस प्रश्न पर अध्यस्त ससार मे आत्यरूपता का अवलोकन ही उपाय हैं. इस आशय से सृष्टि के आरम्भ से ही चछरष्टि ओर आत्मा की अभिन्न सत्ता बतलाते हैं बाहर बड़ा जो वृक्ष दिखाई पड़ता है, वह सूक्ष्मभूत बीज में है, ऐसा मानने में जैसे प्रत्यक्षतः युक्ति है, ठीक इसी तरह अमूर्तिमान्‌ शिवरूप आत्मा में भी मूर्तं जगत्‌ है, ऐसा मानने में वेदादि शास्त्र ओर मुनियों की उक्ति है