Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 39, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 39, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
विसंसृतिर्विसंदेहो लब्धज्योतिर्निरावृतिः ।
शरदाकाशविशदो ज्ञेयो विज्ञायते बुधः ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
संसारशून्य, सन्देहनिर्मुक्त, आत्मप्रकाश प्राप्त कर लेनेवाला,
आवरणात्मक अज्ञान से शून्य तथा शरदाकाश के सदुश अत्यन्त विशद तत्त्वज्ञ ज्ञेयरूप आत्मा ही
है, यह श्रुतियों में जाना जाता है