Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 39, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 39, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
निःसंकल्पो निराधारः शान्तः स्पर्शात्पवित्रताम् ।
अन्तःशीतल आधत्ते ब्रह्मलोकादिवानिलः ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
संकल्पमुक्त, पराधीनता से रहित, भीतरी शीतलता से
युक्त शान्त तत्त्वदर्शी की प्रणाम, शुश्रुषा आदि द्वारा संगति करने से वह पुरुषों को ऐसे पवित्र
(निष्पाप) कर देता है जैसे ब्रह्मलोक से आया हुआ पवन