Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 4, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 4, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 4 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
षड्वर्गो निर्जितः पूर्वं येनोत्तमविदा स्वतः ।
भाजनं स महार्थानां नेतरो नरगर्दभः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस
उत्तम ज्ञानी पुरुष ने सबसे पहले काम, क्रोध आदि छः शत्रुओं के ऊपर विजय पा ली है, वही
बड़े-बड़े अर्थो का भाजन हो सकता है; दूसरा मनुष्यरूपी गदहा नहीं