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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 4, Verse 32

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 4, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 4 · श्लोक 32

संस्कृत श्लोक

अहमर्थाम्बुदे क्षीणे परमार्थशरन्नभः । परयानन्तया लक्ष्म्या स्वच्छयाच्छं विराजते ॥ ३२ ॥

हिन्दी अर्थ

अहंकाररूपी मेघ के छिन्न-भिन्न हो जाने पर परमार्थरूप शरत्काल का आकाश, सर्वोत्तम, स्वच्छ असीम चिति लक्ष्मी से खूब सुन्दर भासित होने लग जाता है