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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 4, Verse 36

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 4, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 4 · श्लोक 36

संस्कृत श्लोक

अहमर्थो जगद्बीजं यदि दग्धमभावनात् । तदहन्त्वं जगद्बन्ध इत्यादेः कलनैव का ॥ ३६ ॥

हिन्दी अर्थ

अहंकार ही जन्ममरण रूप इस संसार का बीज है । भावना के मूल अज्ञान के नाश से जब यह अहंकाररूपी बीज दग्ध हो जाता है तब जगत्‌ ओर बन्ध इत्यादि की कल्पना ही क्या रहती है ?