Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 41, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 41, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 41 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
यज्जाग्रति सुषुप्तत्वं बोधादरसवासनम् ।
तं स्वभावं विदुस्तज्ज्ञा मुक्तिस्तत्परिणामिता ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, तत्त्वज्ञान से जाग्रत् काल में जो राग तथा वासना से शून्य
सुषुप्ति-अवस्था प्राप्त होती है, उसीको तत्त्वज्ञानी लोग ब्रह्मस्वभाव कहते हैं तथा उसी स्वरूप में
भलीभाँति परिनिष्ठित हो जाने को मुक्ति कहते हैं