Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 41, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 41, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 41 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
रसभावविकाराढ्यं नृत्यन्त्यभिनयैर्नवैः ।
परमाणुप्रति प्रायः खे स्फुरन्त्यम्बरात्मिकाः ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रृंगार आदि रसों से रति आदि स्थायिभावों तथा कम्प, स्वेद आदि
संचारिभावों से परिपूर्ण नये-नये अभिनयो से परमाणु की मात्राओं के भी अन्दर विद्यमान चिदाकाश
में चिदाकाशरूप पुतलियाँ प्रायः नृत्य कर रही हैं