Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 42, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 42, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 42 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
विष्वग्विश्वमपारैकपरमाकाशकोशता ।
यथा स्पन्दानिलद्वित्वं शाब्दमेव न वास्तवम् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे वायु और
स्पन्दन का भेद शब्दमात्र है, वास्तविक नहीं है, वैसे ही विश्व और विश्वेश्वर का भेद शब्दमात्र है,
वास्तविक नहीं, असल में असदात्मक ही है