Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 42, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 42, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 42 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
विश्वविश्वेश्वरद्वित्वं तथैवासन्मयात्मकम् ।
सदेवासंभवद्द्वित्वं महाचिन्मात्रकं च यत् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसमें द्वैत की संभावना नहीं है, जो तीनों
काल में सत्स्वरूप ही है और महाचेतनरूप है,वही विश्व के रूप में भासता है, असल में न विश्व
है और न विश्व का कोई स्वरूप ही है