Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 42, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 42, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 42 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
कार्यं चेत्कारणस्यैतत्तथापि ब्रह्ममात्रकम् ।
प्रतिभामात्रमेवाच्छं न तु ज्ञप्तेर्घटादि सत् ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
समस्त
विकल्पों से निर्मुक्त विशुद्ध प्रतिभामात्र ही ब्रह्म का स्वरूप है । विकल्प प्रतिभा भी चिदाभासरूप
ज्ञानरूपा ही है, इसलिए ज्ञान से पृथक् घट आदि का अस्तित्व नहीं है, किन्तु समस्त जगत्
ज्ञानरूप ही है