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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 42, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 42, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 42 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

अविवेकविवेकाभ्यां भासुरं भङ्गुरं जगत् । बोधे सदैव सद्रूपमभासुरमभङ्गुरम् ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामजी, यह सारा संसार अविवेक से चमकीला तथा विवेक से नश्वर है । परमार्थ वस्तु का बोध हो जाने पर तो न यह चमकीला दीखता है ओर न विनश्वर ही प्रतीत होता है । उस समय तो यह एकमात्र सद्रूप परब्रह्म ही बनकर अवशिष्ट रह जाता है