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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 42, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 42, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 42 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

ज्ञप्तिमात्रादृते शुद्धादादिमध्यान्तवर्जितात् । नान्यदस्तीह निर्णीतं महाचिन्मात्ररूपिणः ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

तत्वज्ञान से जो निर्णीत हुआ, उका वर्णन करते है / ज्ञानमात्र, शुद्ध, आदि-मध्य और अन्त से रहित महाचिन्मात्ररूपी परब्रह्म के सिवा ओर कुछ दूसरा रहता ही नहीं, यह तत्त्वज्ञान से निर्णीत हुआ है