Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 43, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 43, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 43 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
तज्ज्ञज्ञातो न मूर्खाणां मूर्खज्ञातो न तद्विदाम् ।
विद्यते जगदर्थोऽसाववाच्यार्थमयो मिथः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
परस्पर कथन के अयोग्य अर्थो से भरे ये जगत् के पदार्थ हैँ । इन्दं तत्त्वज्ञ जैसा समझते हैं वैसा मूर्ख
नहीं समझते ओर मूर्ख जैसा समझते हैं वैसा तत्त्वज्ञ नहीं समञ्जते