Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 43, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 43, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 43 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
निर्वाणताऽवासनता पराऽपतापताज्ञता ।
संसाराध्वनि खिन्नस्य शान्ता विश्रामभूमयः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
अपार संसारमार्गा में निरन्तर चलते रहने के कारण खिन्न हुए पथिको के लिए वही विश्रान्ति
का एक अलग स्थान है, वह विश्रान्ति का स्थान है यों उसकी कल्पनाकर कहते है/
इस संसाररूपी मार्ग में लगातार जलते रहने से खिन्न हुए पथिक के लिए निर्वाणता,
वासनाशून्यता ओर उत्कृष्ट त्रिविधतापशून्यता ये तीनों ही शान्त विश्राम की भूमिका हैं