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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 43, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 43, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 43 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

निरस्तकलनाशङ्कं त्यागग्रहणवर्जितम् । अविसारिसमस्तेच्छं शान्तमास्व यथास्थितम् ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

सम्पूर्ण कल्पनाओं तथा आशंकाओं से रहित, त्याग तथा ग्रहण से शून्य, बहुत दूर तक जानेवाली समस्त इच्छाओं से रहित तथा शान्त होकर हे श्रीरामजी, जैसे आप स्थित हैं, स्थित रहिये