Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 44, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 44, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 44 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
कर्तव्योऽङ्कुरितस्यास्य रक्षिता शिक्षिताशयः ।
संतोषनामा प्रियया नित्यं मुदितयान्वितः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
इस तरह सींचने आदि के बाद बीज में जब अंकुर पैदा
हो जाय, तब इसकी रक्षा के लिए अत्यन्त निपुण सन्तोषनामक पुरुष को उसकी मुदितानामक
प्रियपत्नी के साथ संरक्षक बना देना चाहिये