Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 44, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 44, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 44 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
पश्चात्स्थिताशाविहगान्परप्रणयपक्षिणः ।
अस्मादापततः कामगर्वगृध्रान्निवारयेत् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर पूर्ववासनाओं में स्थित आशारूपी
विहंगों, आत्मा से भिन्न पुत्र, मित्र, आदि में अनुरागरूपी पक्षियों तथा ध्यानांकुर के नाश के लिए
झपट रहे काम, गर्वं धन आदिरूप गीध को इसी सन्तोषनामक रक्षक द्वारा दूर भगा देना चाहिए