Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 44, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 44, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 44 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
निबध्नात्यात्मना पीठं कुलाचल इव स्थितम् ।
फलस्य रचयत्यूर्ध्वं घटिकां मङ्गलादिताम् ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
आत्मज्ञान के मूलबन्ध को यह अपने
से ही ऐसे बाँध देता है, जैसे कुलाचलपर्वत स्थित अपने मूल को । हे श्रीरामजी, यह वृक्ष, अपने
ऊपर कैवल्यनामक फल देनेवाले शान्ति आदि मांगलिक गुच्छों की शोभा सचता है