Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 44, Verse 37
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 44, verse 37 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 44 · श्लोक 37
संस्कृत श्लोक
तं व्याधिदुर्व्याधवैधुर्यपलायनपरायणः ।
अशङ्कितविधिर्व्याधपातादिव कृताकृतिः ॥ ३७ ॥
हिन्दी अर्थ
अनेक व्याधिरूपी दुष्ट व्याधो के दुःखों से पलायन में तत्पर यह मृग दैव की
संभावना से रहित है । व्याधो के आगमन से मानों इसने अपने आकार को संकुचित कर लिया
है