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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 44, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 44, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 44 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

स्वचित्तभूमौ पतितं परिज्ञाय महाधिया । बीजं संसारनिर्वेदो रक्ष्यं ध्यानस्य यत्नतः ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

संसार को त्याग देने की प्रबल इच्छारूप समाधिवीज को अपनी चित्तरूपी भूमि में गिरे जानकर बुद्धिमान्‌ पुरुष को उसकी अनेक यत्नो से रक्षा करनी चाहिये