Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 45, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 45, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 45 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
शास्त्रार्थपल्लवेष्वेव निषण्णात्मावतिष्ठते ।
उन्नतावनता याता अधः पश्यञ्जगद्गतीः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
अध्यात्मशार्त्र से अतिरिक्त शास्त्रों के
अनुसार प्रवृति होने पर प्राणियों को ब्रह्मलोकपर्यन्त उन्नत स्थान प्राप्त होते हैँ तथा स्वाभाविक
प्रवृत्ति होने पर नरकपर्यन्त निम्न श्रेणी के स्थान प्राप्त होते हैँ इस तरह संसार की उन्नत ओर
अवनत दशाओं को अज्ञानावस्था मेँ देख रहा यह अध्यात्मशास्त्र के विषय शम, दम, सन्तोष आदि
रूप पल्लवो मे ही अपने स्वरूप को छिपाकर अवस्थित रहता है