Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 45, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 45, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 45 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
भीमद्रुमलतोत्कीर्णपुष्पप्रकरदन्तुराः ।
प्राक्तनीः स्वाः स्थलीः पश्यन्हसत्यन्तर्वराकताम् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
भयंकर विषवृक्षलताओं में
विकसित विषमय पुष्पसमूहरूपी दांतों से युक्त अपनी पूर्वोक्त सातों अज्ञान की भूमिकाओं को
भीतर देख रहा यह, उस हीन अवस्था को हँसता है