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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 45, Verse 18

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 45, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 45 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

केवलं केवले शुद्धे बोधात्मनि महोन्नते । दत्तदृष्टिः फले तस्मिन्परं समधिरोहति ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

किन्तु केवल शुद्ध बोधमय, महाउन्नत उस एक आत्मज्ञान रूप फल में ही एकमात्र अपने चित्त को लगाकर पंचमभूमिकादि स्थानों मे आरूढ होता है