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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 45, Verse 24

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 45, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 45 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

तां महापदवीं गच्छन्परमार्थफलप्रदाम् । भूमिकामप्युपायाति वचसामप्यगोचराम् ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

परमार्थरूप फल प्रदान करनेवाली उस महापदवी के ऊपर चल रहा यह ज्ञानी पुरुष वाणी के भी अगोचर छड़ी भूमिका में प्राप्त हो जाता है