Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 45, Verse 49
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 45, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 45 · श्लोक 49
संस्कृत श्लोक
मूर्खस्थो विश्वशब्दार्थो नामूर्खविषयस्तथा ।
तज्ज्ञाज्ञयोस्तयोश्चैव विश्वविश्वेशयोस्तथा ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
यही कारण हैं कि तत्त्वज्ञ पुरुषों के लिए विश्व शब्द किसी अर्थ को नहीं रखता इसका अर्थ
बाधित है, यह कहते हैं ।
संसारशब्द का अर्थ मूर्खो के लिए ही है, तत्त्वज्ञानियों के लिए नहीं । इसलिए हे पण्डितों, जिस
भूमानन्द ब्रह्म में संसार के विशेषज्ञान और अज्ञान, तत्त्वज्ञानी और मूर्ख एवं संसार और संसार के
प्रभु परमेश्वर का अभेदरूप से भान होता है उसी में आप लोग विश्राम करें