Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 45, Verse 50
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 45, verse 50 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 45 · श्लोक 50
संस्कृत श्लोक
यत्रैकीभूय कचनं तत्र विश्राम्यतां बुधाः ।
बोधभूमिषु सिद्धानामर्थानां वा विवेकिनाम् ॥ ५० ॥
हिन्दी अर्थ
क्योकि मनन
आदि बोधरूप भूमियों में आरूढ़ हो रहे विवेकियों या आत्मसाक्षात्कारादि भूमियों में आरूढ़ हो चुके
सिद्ध महानुभावों में से किसी ने भी पदार्थों में आत्मा से अतिरिक्त सत्ता या असत्ता या द्वैतता या
एकता का इस संसार में आज तक निर्णय नहीं किया हे