Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 45, Verse 53

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 45, verse 53 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 45 · श्लोक 53

संस्कृत श्लोक

जगत्युदेति संघट्टादाविशेषं समे समे । ज्ञातपूर्वापराशेषजगदष्टापदस्थितेः ॥ ५३ ॥

हिन्दी अर्थ

इस तरह अनादि काल से इस संसार में चक्कर लगा रहे जीवों के बीच में भाग्यवशात्‌ किसी एकको ज्ञान प्राप्त करने योग्य जन्म मिल जाने पर शास्त्रं के निरन्तर अभ्यास तथा महात्माओं की संगति से उपायप्राप्ति द्वारा पूर्वापर सम्पूर्ण जन्मभ्रमणरूप जगद्रूपी शतरंज खेलने की बिसात की (४) जानकारी हो जाने से उस पुरुषश्रेष्ठ को ज्ञान ओर वैराग्यरूपी दो दीपकों में से किसी एक की सिद्धि हो जाने पर दोनों ही सिद्ध हो जाते हैं