Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 46, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 46, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 46 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
श्रुतपाठजपान्तेषु समाधिनिरतो भवेत् ।
समाधिविरतः श्रान्तः श्रुतपाठजपाञ्छ्रयेत् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
चाहिए, इस विषय में क्रम बतलाते हैं /
भद्र, पहले गुरु, सहपाठी आदि के साथ वेदान्तश्रवण करे, उपनिषदों की आवृत्ति करे, फिर
प्रणवजप करे, इतना सब कर लेने के बाद समाधि में तत्पर हो जायें और समाधि टूट जाने पर
समाधिश्रान्त वह पुरुष फिर श्रवण, आवर्तन एवं प्रणव जप करे