Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 46, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 46, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 46 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
ध्यानद्रुमफलप्राप्तौ बोधतामागतं मनः ।
वज्रसारां स्थितिं धत्ते छिन्नपक्ष इवाचलः ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
ध्यानरूपी वृक्ष को परमार्थरूप फल
की प्राप्ति हो जाने पर बोधरूपता को प्राप्त यह मन वज्र के समान दृढ़ स्थिति एसे धारण कर लेता
है, जैसे पंखशून्य पर्वत