Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 46, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 46, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 46 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
मनस्ता क्वापि संयाति तिष्ठत्यच्छैव बोधता ।
निर्बाधा निर्विभागा च सर्वाऽखर्वात्मिका सती ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
अवशिष्ट रह जाती है