Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 46, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 46, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 46 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
केवलं दृश्यते योगी गतो ध्यानैकनिष्ठताम् ।
स्थितो वज्रसमाधाने विपक्ष इव पर्वतः ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
ऐसी दशा में योगी एकमात्र ध्यानैकनिष्ठ दिखाई देता है। वज के तुल्य दृढ़ समाधि में यह ऐसे स्थिर
हो जाता है, जैसे पंखशून्य पर्वत