Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 47, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 47, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 47 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
प्रज्ञा प्रसादमायाति क्रमादुचितकर्मणः ।
अन्तःकरोति शास्त्रार्थमर्थं मुकुरभूरिव ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
क्रम से किये गये उचित निष्काम कर्म से
बुद्धि का मल हट जाता है, बुद्धि का मल हट जाने पर आत्मजिज्ञासा का आविभव हो जाता है और
गुरुजी के मुख से सुना गया शास्त्र का अर्थ मनुष्य के हृदय के भीतर ऐसे पैठ जाता है, जैसे
दर्पणतल के भीतर प्रतिबिम्ब पैठ जाता है