Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 47, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 47, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 47 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
अथ तं द्रष्टुमायान्ति सौहार्देनैव साधवः ।
भूमाविवोदितं चन्द्रं विस्मयोत्फुल्ललोचनाः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
इस तरह के पुरुष को एक तरह से पृथ्वी में उदय को प्राप्त चन्द्रमा ही
समझना चाहिए, इसे देखने के लिए केवल परम प्रेम से ही विस्मय से प्रफुल्ल नेत्रोवाले सिद्ध पुरुष
आते हैं