Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 47, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 47, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 47 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
ततः सज्जनसंपर्कमुदर्कश्रेयसे स्वयम् ।
करोति स्वस्थतागृध्रुर्भिषगाश्रयणं यथा ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
अनन्तर जैसे स्वास्थ्य चाहनेवाला पुरुष वैद्य की
शरण लेता है, वैसे ही अपने भावी अधिक कल्याण के लिए स्वयं ही वह सज्जनो की शरण लेता
है