Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 47, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 47, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 47 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
तेनोदारमतिर्भूत्वा शास्त्रार्थेषु निमज्जति ।
महान्महाप्रसन्नेषु सरःस्विव महागजः ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
सज्जनं के समागम से उसकी बुद्धि बड़ी उदार हो जाती है, उदारवुद्धि होकर वह
उपनिषद् के महावाक्यार्थो के विचार में ऐसे डूब जाता है, जैसे अत्यन्त प्रसन्न सरोवर में महान्
हाथी डूब जाता है