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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 47, Verse 40

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 47, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 47 · श्लोक 40

संस्कृत श्लोक

तावन्नायाति वैरस्यं चिन्ताविषयजृम्भणैः । यावदर्थमहानर्थो न कदर्थार्थमर्थ्यते ॥ ४० ॥

हिन्दी अर्थ

जब तक पुरुष निन्दनीय ऐहिक या पारलौकिक अर्थों के लिए महान दुःख रूप अनर्थ झेलने की इच्छा नहीं करता, तभी तक पुरुष चिन्तित अर्थो के कारण उत्पन्न सन्तापो से नहीं सूखता