Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 47, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 47, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 47 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
नन्वर्था विततानर्थाः संपदः संततापदः ।
भोगा भवमहारोगा विपरीतेन भाविताः ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, यदि
विवेक से विचारा जाय, तो ये अर्थ बड़े भारी अनर्थरूप, सम्पत्तियाँ महान् विपत्तिरूप और भोग
संसार के महान् रोगरूप ही सिद्ध होते हैं। परन्तु मोह के कारण प्राणी उनको वैसा नहीं समझता